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टाटा स्टील फाउण्डेशन, जमशेदपुर द्वारा संचालित कुँड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण का 5 दिवसीय आवासीय कार्यशाला सम्पन्न

1 day 5 hours ago
टाटा स्टील फाउण्डेशन, जमशेदपुर द्वारा संचालित कुँड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण का 5 दिवसीय आवासीय कार्यशाला सम्पन्न admin Fri, 09/23/2022 - 19:05

दिनांक 13 सितम्बर 2022 से 17 सितम्बर 2022 तक, टाटा स्टील फाउण्डेशन द्वारा सहयोगी संस्था, उरांव सरना समिति, चक्रधरपुर (प०सिंहभूम) एवं अद्दी कुँड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, राँची के सहयोग से कुँड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण, का 5 दिवसीय आवासीय कार्यशाला, टी०सी०एस० सोनारी, जमशेदपुर में सम्पन्न हुआ। इस आवासीय कार्यशाला में प०सिंहभूम से 28 सेन्टर के भाषा शिक्षक और संयोजक तथा रांची, गुमला, लोहरदगा जिला से 23 सेन्टर के भाषा शिक्षक और संयोजक शामिल हुए।

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मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा

3 days 5 hours ago
मन्दर बिरो- झारखंड राज्य की पारंपरिक चिकित्सा admin Wed, 09/21/2022 - 19:29

'मन्दर बिरो' कुड़ुख शब्द है, जिसका अर्थ है - औषधि द्वारा उपचार करना। पारंपरिक चिकित्सा शैली जिसमें वैद्य ( मन्दर-अख़ 'उस ) द्वारा बीमारी को दूर करने या कम करने के लिए रोगी ( मन्दा ) को जड़ी-बूटी, चूरन या दवा के रूप में औषधि ( मन्दर ) दी जाती है। उपयोग में लाए गए पौधे के भाग एवं तैयारी की विधि ही औषधीय प्रभाव के लिए जवाबदेह हैं। पौधो के संरक्षण के साथ ज्ञान का उपयोग में लाना अति आवश्यक है। भविष्य के विषम परिस्थितियों में मानव जाति की स्वास्थ्य की सुरक्षा का हल प्रकृति से ही प्राप्त होगा। बदलते मौसम और वायुमंडलीय प्रभाव के कारण पौधों की संरचना में बदलाव देखा जा रहा है। जड़ी-बूटी के औषधीय होने

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करम परब (2022) की शुभकानाएं!!

2 weeks 4 days ago
करम परब (2022) की शुभकानाएं!!

देश के जनजातीय / आदिवासी इलाकों में 06 सितंबर 2022 को 'करम परब' मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आप सबको ढ़ेर सारी बधाई और शुभकामनाएं !!!

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कुंड़ुख टाइम्‍स पत्रिका / अंक 03 अप्रैल से जून 2022

1 month 2 weeks ago
कुंड़ुख टाइम्‍स पत्रिका / अंक 03 अप्रैल से जून 2022 admin Wed, 08/10/2022 - 20:26

कुंड़ुख टाइम्‍स पत्रिका का 3रा अंक (अप्रैल से जून 2022) यहां पीडीएफ में उपलब्‍ध है। पढें.. जरूरत है तो डाउनलोड भी कर सकते हैं। 

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कुड़ुख़ लिपि दर्शन

1 month 2 weeks ago
कुड़ुख़ लिपि दर्शन admin Tue, 08/09/2022 - 10:08

भूमिका : कुड़ुख़ लिपि को तोलोंग सिकि के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यह लिपि कुड़ुख़ बोलने वालों की तोलोंग (परम्परागत वस्त्र) पहनने की कला तथा उनके घुमने-फिरने व काम करने के तरीकों के अनुसार बनायी गयी है। कहने का तात्पर्य यह कि तोलोंग-लिपि, कुड़ुख़ संस्कृति की विशेषताओं को उजागर करते हुए गढ़ी गयी है। चूँकि इस विषय पर पर्याप्त लिखा जा चुका है, इसलिए इस लघु लेख में कुड़ुख़ लिपि के दर्शन पर विचार किया जा रहा है। 

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मंजु उरांव के खिलाफ समाज का तुगलकी फरमान स्‍वीकार्य नहीं, विरोध होगा : सेंगेल

1 month 2 weeks ago
मंजु उरांव के खिलाफ समाज का तुगलकी फरमान स्‍वीकार्य नहीं, विरोध होगा : सेंगेल admin Thu, 08/04/2022 - 21:14

आदिवासी महिला मंजू उरांव (गुमला जिला) को  ट्रैक्टर से खेती करने के एवज में गांव वालों ने अंधविश्वास के आधार पर उनको ट्रैक्टर चलाने से मना किया, जुर्माना लगाया और बात नहीं मानने पर सामाजिक बहिष्कार करने का एकतरफा तुगलकी फरमान जारी किया है। जो संविधान कानून के खिलाफ है। स्त्री पुरुष की बराबरी के दर्जे के खिलाफ है और बिल्कुल एक अंधविश्वास वाला फरमान है। गलत है। आदिवासी सेंगेल अभियान, जिला पुलिस- प्रशासन और प्रदेश की सरकार से अविलंब मंजू उरांव को सुरक्षा और न्याय प्रदान करने की मांग करता है। बल्कि  उनको उनकी खेती और कृषि के विकास के लिए प्रोत्साहन और पूर्ण सहयोग भी सरकार को प्रदान करना चाहिए और

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सरना समाज और उसका अस्तित्व : एक पुस्‍तक चर्चा

1 month 2 weeks ago
सरना समाज और उसका अस्तित्व : एक पुस्‍तक चर्चा admin Thu, 08/04/2022 - 09:11

‘‘सरना समाज और उसका अस्तित्व’’ नामक इस छोटी पुस्तिका में आदिवासी उराँव समाज की जीवन यात्रा का वृतांत है, जो भारत देश की आजादी के दो दशक बाद, उराँव लोग विषम परिस्थिति में अपने पुर्वजों की धरोहरों को सहेजते हुए देश की मुख्यधारा के साथ चलने का प्रयास कर रहे थे। देश की आजादी के बाद भी आदिवासी उराँव समाज का धार्मिक विश्‍वास एवं सामाजिक जागृति तथा आधुनिक शिक्षा जैसे विषयों पर निचले पायदान से उठने की कोशिश करते हुए आगे बढ़ रहे थे। इस छोटी सी पुस्तिका में 1965 से 1989 के बीच के सामाजिक परिस्थिति पर आधारित तथ्य-लेख का चित्रण है। संभव है, कई पाठक इसमें उद्धृत तर्कों से सहमत न हों, पर इसे विगत समय की स

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आदिवासी राष्ट्रपति और आदिवासी गांव-समाज -सालखन मुर्मू

1 month 3 weeks ago
आदिवासी राष्ट्रपति और आदिवासी गांव-समाज -सालखन मुर्मू

देश ने एक आदिवासी संताल महिला द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर एक नया इतिहास बनाया है। दुनिया के सर्वाधिक बड़ी गणतंत्र भारत ने मिसाल कायम किया है। जो 200 वर्षों में भी अमेरिका नहीं कर पाया है। देश के लिए गर्व और सम्मान की  बेला है। परंतु आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक समृद्धि का जड़ उनका गांव- समाज है। जहां परंपरा के नाम पर कतिपय कुव्यवस्था, कुप्रथा, कुरीतियां अभी भी विद्यमान हैं। जहां आदिवासी स्वशासन व्यवस्था या ट्राइबल सेल्फ रुल सिस्टम (TSRS) में जनतंत्र और संविधान लागू नहीं है। गांव-समाज का राष्ट्रपति या ग्राम प्रधान (माझी बाबा) सबकी सहमति से नहीं वंशानुगत नियुक्त होता है और ज

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टाटा स्टील फाउण्डेशन के तकनीकी सहयोग से भाषा-लिपि शिक्षण आरंभ होगा

1 month 3 weeks ago
टाटा स्टील फाउण्डेशन के तकनीकी सहयोग से भाषा-लिपि शिक्षण आरंभ होगा admin Fri, 07/29/2022 - 19:30

दिनांक 22.07.2022 दिन बुधवार को ऐतिहासिक पड़हा जतरा खुटा शक्तिस्थल, मुड़मा (राँची) झारखण्ड के परिसर में समाजसेवी माननीय श्री बंधन तिग्गा जी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इस बैठक में टाटा स्टील फाउण्डेशन जमशेदपुर के अधिकारी एवं अद्दी कुँड़ुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा) झारखण्ड, राँची नामक संस्था के पदधारी उपस्थित थे।

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आदिवासी मौसम पुर्वानुमान पर जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान आधारित शोध की आवश्‍यकता पर विचार हो

2 months ago
आदिवासी मौसम पुर्वानुमान पर जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान आधारित शोध की आवश्‍यकता पर विचार हो

वातावरण हर समय बदल रहा हैं। वैश्विक मौसम पैटर्न को देखकर मौसम विज्ञानी ध्रुवीय परिक्रमा करने वाले उपग्रह की मदद से भविष्य की सात दिनों का 80 प्रतिशत तक सटीक मौसम पूर्वानुमान करते हैं। पर दस दिन या उससे अधिक समय का पूर्वानुमान केवल आधे समय के लिए ही सही होता है।

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देश को मिला पहला महिला आदिवासी राष्‍ट्रपति / द्रौपदी की जीत पर..

2 months ago
देश को मिला पहला महिला आदिवासी राष्‍ट्रपति / द्रौपदी की जीत पर.. admin Fri, 07/22/2022 - 11:41

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज कर भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के तौर पर अपना नाम दर्ज करवा लिया है। मुर्मू की जीत पर देश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में उत्‍साह और आशाओं की लहर व्‍याप गई है। मुर्मू की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें बधाई देने के लिए उनके घर पहुंचे, वहीं उनके साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी नए राष्ट्रपति को बधाई देने पहुंचे।

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गांव-समाज में सुधार, एकता और एजेंडा से आदिवासी बच सकते हैं - सालखन मुर्मू

2 months 1 week ago
गांव-समाज में सुधार, एकता और एजेंडा से आदिवासी बच सकते हैं - सालखन मुर्मू

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 1994 से  आदिवासी अस्तित्व, पहचान, हिस्सेदारी आदि को समझने, सहयोग करने और संवर्धन करने हेतु दुनिया भर में विभिन्न देश और आदिवासी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस  मनाते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 13 सितंबर 2007 को विश्व आदिवासी अधिकार घोषणा- पत्र भी जारी किया है। संयुक्त राष्ट्र ने 2022 से 2032 के दशक को आदिवासी भाषाओं के संरक्षण का दशक घोषित किया है।आज दुनिया भर में लगभग 7000 भाषाएं हैं जिसके लगभग 40% भाषाएं विलुप्ति की कगार पर खड़े हैं, और उसमें सर्वाधिक आदिवासी भाषाएं डेंजर जोन में हैं।

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आदिवासियों में मौसम पूर्वानुमान की विधि : Method of weather forecasting in tribal

2 months 1 week ago
आदिवासियों में मौसम पूर्वानुमान की विधि : Method of weather forecasting in tribal

आदिवासियों में मौसम पूर्वानुमान की विधि : Method of weather forecasting in tribal

गुमला (सिसई) के एक कोटवार गजेेन्‍द्र उरांव बता रहे हैं आदिवासी समाज में अनूठी परंपरा है मौसम पूर्वानुमान की.. 

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औसत से कम वर्षा होने का पूर्वानुमान का प्रथम भाग सही साबित हुआ

2 months 2 weeks ago
औसत से कम वर्षा होने का पूर्वानुमान का प्रथम भाग सही साबित हुआ admin Wed, 07/06/2022 - 11:52

दिनांक 21.06.2022 दिन मंगलवार को उरागन डिप्पा, ग्राम: सैन्दा, थाना: सिसई, जिला: गुमला (झारखण्ड) में पारम्परिक ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा वर्ष 2022 का मौसम पूर्वानुमान किया गया। पारम्परिक मौसम पूर्वानुमान कर्ता श्री गजेन्द्र उराँव, 65 वर्ष, ग्राम: सैन्दा, सिसई (गुमला) तथा श्री बुधराम उराँव, 66 वर्ष, ग्राम: सियांग, सिसई (गुमला) द्वारा अपने पारम्परिक ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर वर्ष 2022 का मौसम पूर्वानुमान का प्रथम भाग सत्य साबित हुआ है।

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आदिवासी परंपरानुगत अनुमान: औसत से कम वर्षा होने का मौसम पूर्वानुमान 2022

3 months ago
आदिवासी परंपरानुगत अनुमान: औसत से कम वर्षा होने का मौसम पूर्वानुमान 2022 admin Fri, 06/24/2022 - 10:35

दिनांक 21.06.2022 दिन मंगलवार को उरागन डिप्पा, ग्राम : सैन्दा, थाना : सिसई, जिला : गुमला (झारखण्ड) में पारम्परिक ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा वर्ष 2022 का मौसम पूर्वानुमान किया गया। पारम्परिक मौसम पूर्वानुमान कर्ता श्री गजेन्द्र उराँव, 65 वर्ष, ग्राम : सैन्दा, थाना : सिसई (गुमला) तथा श्री बुधराम उराँव, 66 वर्ष, ग्राम : सियांग, थाना : सिसई (गुमला) द्वारा अपने पारम्परिक ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर विगत 10 वर्षों से मौसम पूर्वानुमान किया जा रहा है, जो प्रशंसनीय एवं अतुलनीय है। 

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पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार : एक उराँव आदिवासी महिला की कलम से

3 months 1 week ago
पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार : एक उराँव आदिवासी महिला की कलम से

देश की आजादी के बाद भारत में नया संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और कई पुराने छोटे-बड़े रियासत एक झण्डे के नीचे आ गये। इस नव निर्माण में लोगों के बीच, संविधान बनने के पूर्व से चले आ रहे हिन्दु पर्सनल लॉ, मुस्लिम पर्सनल लॉ, ईसाई विवाह कानुन इत्‍यादि सामाजिक एवं सम्प्रदायिक कानून नये संविधान में यथावत स्वीकार कर लिया गया। भारतीय जनजाति समूह क्षेत्र में भी 5वीं एवं 6वीं अनुसूचित क्षेत्र के नाम से विषेष प्रशासनिक क्षेत्र निर्धारित किया गया। इन्ही 5वीं अनुसूची क्षेत्र के अन्तर्गत उराँव (कुँड़ुख़) जनजाति के नाम से देश के कई हिस्से में निवासरत है। इनकी अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति, रीति-रिवाज, परम्पर

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1 hour 58 minutes ago
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