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Kurukh Times Magazine Vol 05

कुंड़ुख टाइम्‍स (वेब संस्‍करण) का अक्‍टूबर से दिसंबर 2022 / अंक 5 का यह संस्‍करण काफी पठनीय है। आप इसे यहां ऑनलाइन पढ…

Dhumkuria Book

धुमकुड़िया, उराँव आदिवासी समाज की एक पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र है। प्राचीन काल से ही यह, गा…

Kurukh Times print edition 04
कुंड़ुख टाइम्‍स त्रैमासिक पत्रिका का चतुर्थ (4th)अंक प्रकाशित हो गया है। यह अंक 'बिसुसेन्‍दरा विशेषांक' है। यह अंक Tata
शब्‍दावली बैठक 1

दिनांक 01 मई 2022, दिन रविवार को आदिवासी उराँव समाज समिति, बिरसा नगर, जोन न०-6, जमशेदपुर में ‘‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पार…

KurukhTimes.com Print Edition Vol. 1

आपको तो पता है कि हमारा-आपका एक और वेबसाइट KurukhTimes.com लम्‍बे समय से आपको कुंड़ुख जगत की खबरें, सूचनाएं और शोध आद…

पहेलियां..

कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग बखुबी होता है। बच्चों के लिए यह बौदि्धक एवं भाषा विकास का एक अनोखा तरीका है जिसे स…

कुड़ुख मुहावरे

कुंड़ुख़ भाषा में मुहावरा एवं कहावत का प्रयोग बखुबी होता है। कई असहज बातों को इससे आसानी से समझा जाता है। आइये इसे जाने…

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झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन के दौरान छात्र नेताओं एवं शिक्षाविदों के बीच झारखण्ड की भाषा–संस्कृति को बचाये रखने के विष…

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धुमकुड़िया महबा उल्ला (धुमकुड़िया गौरव दिवस) सम्पन्न

2 days 23 hours ago
धुमकुड़िया महबा उल्ला (धुमकुड़िया गौरव दिवस) सम्पन्न admin Mon, 02/06/2023 - 08:22

दिनांक 05/02/2023 दिन  रविवार को थाना सिसई, जिला गुमला के ग्राम सैंदा में धुमकुड़िया महबा उल्ला (दिवस) का आयोजन किया गया। इस आयोजन में गाँव के देबीगुड़ी (देवी मां) में छोटे छोटे  बालक बलिकाओं को विधिवत पूजा अर्चना करा कर धुमकुड़िया में प्रवेश दिलाया गया। वहीं शादी का रिश्ता तय हुआ लड़का श्री ऋषभ उरांव को धुमकुड़िया से बिदाई किया गया, जो वर्तमान में इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं । इस अवसर पर कानून विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर, ला युनिवर्सिटी, रांची के श्री रामचंद्र उरांव ने कहा कि - धुमकुड़िया, हमारे कुँड़ुख समाज का पहला स्कूल का केंद्र है। उन्होंने कहा कि आदि काल से ही कुँड़ुख समाज के लोग ध

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कुंड़ुख टाइम्‍स (वेब संस्‍करण) का अक्‍टूबर से दिसंबर 2022 / अंक 5 प्रकाशित

1 week ago
कुंड़ुख टाइम्‍स (वेब संस्‍करण) का अक्‍टूबर से दिसंबर 2022 / अंक 5 प्रकाशित

कुंड़ुख टाइम्‍स (वेब संस्‍करण) का अक्‍टूबर से दिसंबर 2022 / अंक 5 का यह संस्‍करण काफी पठनीय है। आप इसे यहां ऑनलाइन पढ़ सकते हैं। आप चाहें तो इसका पीडीएफ फाइल भी अपने लैपटॉप या पीसी अथवा मोबाइल पर डाउनलोड कर सकते।

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कुंड़ुख़ इंग्लिश मीडियम स्‍कूल में गणतंत्र दिवस संपन्‍न

1 week 2 days ago
कुंड़ुख़ इंग्लिश मीडियम स्‍कूल में गणतंत्र दिवस संपन्‍न

यह विडियो दिनांक 26 जनवरी 2023 को शूट किया गया है। यह विडियो कुंड़ुख़ कत्थ खोंड़हा लूरएड़पा, भगीटोली, डुमरी, गुमला (कुंड़ुख़ इंग्लिश मीडियम) स्कूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर पारम्परिक वेशभूषा में प्रस्तुत किया गया परेड है। इस स्कूल में 1ली से 3री कक्षा तक सिर्फ कुंड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि में पढ़ाई होती है। आगे 4थी कक्षा से हिन्दी एवं अंग्रेजी पढ़ाया जाता है और आगे चलकर यह इंग्लिश मीडियम स्कूल में बदल जाता है। इस स्कूल से वर्ष 2009 से कुंडुख़ भाषा विषय की परीक्षा तोलोंग सिकि में मैट्रिक परीक्षा लिखी जा रही है। विगत वर्ष 2022 में यहां के सभी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए। इस स्कूल के संस्थापक

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टाटा स्‍टील की ओर से भंडरा में तोलोंग सिकि प्रशिक्षण संपन्‍न

1 week 3 days ago
टाटा स्‍टील की ओर से भंडरा में तोलोंग सिकि प्रशिक्षण संपन्‍न

दिनांक 28 फरवरी 2023 दिन शनिवार को भंडरा (लोहरदगा) प्रखंड के आशा आदिवासी विद्यालय, बलसोता  में  टाटा स्टील फाउंडेशन की ओर से संचालित कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि शिक्षण केन्द्र के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ एक दिवसीय निरिक्षण सह प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस निरिक्षण सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में टाटा स्टील फाउंडेशन के पदाधिकारियों के द्वारा कुँड़ुख भाषा एवं तोलोंग सिकि लिपि की विकास पर विशेष रूप से चर्चा की गयी। विशेष रुप से आदिवासी भाषा की संरक्षण हेतु स्कूलों में पाठन पाठन की आवश्यकता को  विकल्प बतलाया गया।

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धुमकुडि़या : पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र

2 weeks 2 days ago
धुमकुडि़या : पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र

धुमकुड़िया, उराँव आदिवासी समाज की एक पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र है। प्राचीन काल से ही यह, गाँव में एक व्यक्तित्व एवं कौशल विकास शिक्षण-शाला के रूप में हुआ करता था, जो गाँव के लोगों द्वारा ही चलाया जाता था। समय के साथ यह पारम्परिक सामाजिक, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास केन्द्र विलुप्त होने की स्थिति में है। कुछ दशक पूर्व तक यह संस्था किसी-किसी गाँव में दिखलाई पड़ता था किन्तु वर्तमान शिक्षा पद्धति के प्रचार-प्रसार के बाद यह इतिहास के पन्ने में सिमट चुका है। कुछ लेखकों ने इसे युवागृह कहकर यौन-शोषन स्थल के रूप में पेश किया, तो कई मानवशास्त्री इसे असामयिक कहे, किन्तु अधिकतर च

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सैन्‍दा गांव में धुमकुडि़या जतरा का आयोजन

1 month ago
सैन्‍दा गांव में धुमकुडि़या जतरा का आयोजन

झारखंड के गुमला जिला के सिसई थाना स्थित सैन्‍दा गांव में धुमकुडि़या जतरा का आयोजन दिनांक 16 फरवरी 2022 को किया गया था। पूर्व में धमकुड़िया एक सामाजिक तथा सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा था। आधुनिक स्कूल की स्थापना के बाद यह संस्था विलुप्त होने की राह पर है। अब, जब समाज सेवियों एवं शिक्षाविदों   की दृष्टि इस ओर पड़ी तो कुछ नवयुवक नवयुवती इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार हो गए हैं। इसी क्रम में सैन्दा ग्राम में यह धुमकुड़िया जतरा समारोह मनाया गया। इस धुमकुड़िया जतरा समारोह में इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे लड़के भी शामिल हुए। साथ ही नौकरी पेशा वाले ग्राम वासी भी अपने बच्चों को साथ लेकर आये। इ

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Learning KURUKH [Tribal Language] through Rhymes Recitation in Rural Jharkhand II

1 month 1 week ago
Learning KURUKH [Tribal Language] through Rhymes Recitation in Rural Jharkhand II

पूरा वीडियो यहां देखें: https://youtu.be/AU5W3dAqQgQ 
इस वीडियो के बाल-गीत के बोल- 
छोटे बच्‍चे अपनी मां से चिडि़यों के बच्‍चे के माध्‍यम से संदेश देते हुए कहते हैं कि - 
ओ मां, छोटी चिडि़यां चेरे-बेरे चेरे-बेरे, चीं - चीं - चीं कर रही हैं, और चेरे-बेरे, चेरे-बेरे करते हुए दूध भात मांग रही है। 
ओ मां, छोटी चिडि़यां चेरे-बेरे चेरे-बेरे, चीं - चीं - चीं कर रही हैं, और चेरे-बेरे, चेरे-बेरे करते हुए पैण्‍ट-कमीज मांग रही है। 

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Learning KURUKH [Tribal Language] through Rhymes Recitation in Rural Jharkhand III

1 month 1 week ago
Learning KURUKH [Tribal Language] through Rhymes Recitation in Rural Jharkhand III

पूरा वीडियो यहां देखें: https://youtu.be/AU5W3dAqQgQ 
बाल कविता में छोटे बच्‍चों में से एक भाई अपनी छोटी बहन के लिए चन्‍दा मामा से गरम-गरम रोटी की मांग करते हुए दोनों भाई-बहन कहते हैं कि -
ओ चन्‍दा मामा, तुम मेरी छोटी बहन और मेरे लिए रोटी दो, तुम हम दोनों के लिए रोटियां दो।
ओ चन्‍दा मामा, हमारी मां का दिया हुआ रोटी गड्ढे में गिर गया, जिसे एक लालची बुढि़या उठा ली और अकेले खा गई, हमें नहीं दी।
ओ चन्‍दा मामा, छिलका रोटी नहीं, छाना हुआ रोटी हो तथा ठण्‍डा नहीं गरम हो, ओ चन्‍दा मामा तुम हमें रोटियां दो, हमें रोटियां दो।
साभार - चींचो डण्‍डी अरा ख़ीरी,

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