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शब्‍दावली बैठक 1

दिनांक 01 मई 2022, दिन रविवार को आदिवासी उराँव समाज समिति, बिरसा नगर, जोन न०-6, जमशेदपुर में ‘‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पार…

KurukhTimes.com Print Edition Vol. 1

आपको तो पता है कि हमारा-आपका एक और वेबसाइट KurukhTimes.com लम्‍बे समय से आपको कुंड़ुख जगत की खबरें, सूचनाएं और शोध आद…

पहेलियां..

कुंड़ुख़ भाषा में पहेलियों का प्रयोग बखुबी होता है। बच्चों के लिए यह बौदि्धक एवं भाषा विकास का एक अनोखा तरीका है जिसे स…

कुड़ुख मुहावरे

कुंड़ुख़ भाषा में मुहावरा एवं कहावत का प्रयोग बखुबी होता है। कई असहज बातों को इससे आसानी से समझा जाता है। आइये इसे जाने…

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झारखण्ड अलग प्रांत आन्दोलन के दौरान छात्र नेताओं एवं शिक्षाविदों के बीच झारखण्ड की भाषा–संस्कृति को बचाये रखने के विष…

Kurukh 8th Language in W Bengal

It was the initiative of the Honorable CM of West Bengal, Mamata Banerjee that Kurukh language was declared on 21st F…

Jharkhand Govt Notices

ज्ञात हो कि तोलोङ सिकि अथवा तोलोंग लिपि को कुँड़ुख (उराँव) समाज ने कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में स्वीकार किया है। इस…

लिपि चिन्‍ह

‘‘ब्रह्माण्ड में पृथ्वी कृत्रिम घड़ी की विपरीत दिशा Anticlockwise में सूर्य की परिक्रमा करती है। जिसके चलते सभी प्राकृ…

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आदिवासी परंपरानुगत अनुमान: औसत से कम वर्षा होने का मौसम पूर्वानुमान 2022

1 week 3 days ago
आदिवासी परंपरानुगत अनुमान: औसत से कम वर्षा होने का मौसम पूर्वानुमान 2022

दिनांक 21.06.2022 दिन मंगलवार को उरागन डिप्पा, ग्राम : सैन्दा, थाना : सिसई, जिला : गुमला (झारखण्ड) में पारम्परिक ग्रामीण मौसम पूर्वानुमान कर्ता द्वारा वर्ष 2022 का मौसम पूर्वानुमान किया गया। पारम्परिक मौसम पूर्वानुमान कर्ता श्री गजेन्द्र उराँव, 65 वर्ष, ग्राम : सैन्दा, थाना : सिसई (गुमला) तथा श्री बुधराम उराँव, 66 वर्ष, ग्राम : सियांग, थाना : सिसई (गुमला) द्वारा अपने पारम्परिक ज्ञान एवं अनुभव के आधार पर विगत 10 वर्षों से मौसम पूर्वानुमान किया जा रहा है, जो प्रशंसनीय एवं अतुलनीय है। 

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पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार : एक उराँव आदिवासी महिला की कलम से

2 weeks 4 days ago
पिता की संपत्ति पर बेटी का अधिकार : एक उराँव आदिवासी महिला की कलम से

देश की आजादी के बाद भारत में नया संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और कई पुराने छोटे-बड़े रियासत एक झण्डे के नीचे आ गये। इस नव निर्माण में लोगों के बीच, संविधान बनने के पूर्व से चले आ रहे हिन्दु पर्सनल लॉ, मुस्लिम पर्सनल लॉ, ईसाई विवाह कानुन इत्‍यादि सामाजिक एवं सम्प्रदायिक कानून नये संविधान में यथावत स्वीकार कर लिया गया। भारतीय जनजाति समूह क्षेत्र में भी 5वीं एवं 6वीं अनुसूचित क्षेत्र के नाम से विषेष प्रशासनिक क्षेत्र निर्धारित किया गया। इन्ही 5वीं अनुसूची क्षेत्र के अन्तर्गत उराँव (कुँड़ुख़) जनजाति के नाम से देश के कई हिस्से में निवासरत है। इनकी अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति, रीति-रिवाज, परम्पर

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‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

4 weeks 1 day ago
‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न

दिनांक 01 मई 2022, दिन रविवार को आदिवासी उराँव समाज समिति, बिरसा नगर, जोन न०-6, जमशेदपुर में ‘‘कुँड़ुख़ व्याकरण की पारिभाषिक शब्दावली‘‘ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला, टाटा स्टील फाउण्डेशन, जमशेदपुर के तकनीकि सहयोग से संचालित ‘‘कुँड़ुख़ (उराँव) भाषा एवं लिपि शिक्षण कार्यक्रम‘‘ का अग्रेतर क्रियान्वयन था। इस कार्यशाला में आदिवासी उराँव समाज समिति, बिरसा नगर के पदधारी सहित माध्यामिक विद्यालय के छात्रगण एवं कालेज के छात्र उपस्थित थे। कार्यशाला का शुभारंभ समिति के अध्यक्ष श्री बुधराम खलखो के आशीर्वचन से हुआ।

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'बेटी को पिता की जमीन में हिस्‍सेदारी के हाईकोर्ट के फैसले से आदिवासियों की बिसु सेन्‍दरा आहत है'

1 month 1 week ago
'बेटी को पिता की जमीन में हिस्‍सेदारी के हाईकोर्ट के फैसले से आदिवासियों की बिसु सेन्‍दरा आहत है'

आदिवासियों बेटियों की पिता की जमीन में हिस्‍सेदारी के पक्ष में हाईकोर्ट के फैसले आदिवासी समाज का एक तबका खुद को आहत बता रहा है। 22 मई को भरनो थाना क्षेत्र में 22 पड़हा पारंपरिक बिसु सेन्‍दरा द्वारा आयोजित वार्षिक बैठक में यह चिंता का विषय बना रहा। संगठन द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके यह जानकारी दी गई है। 

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प्रकृति और कुंडुख भाषा विकास

1 month 2 weeks ago
प्रकृति और कुंडुख भाषा विकास

भारतीय भूमि की यह विशिष्टता है कि यहाँ की भूमि में पानी और वाणी की विविधता है। भारतीय उपमहाद्वीप में कुड़ुख भाषी आदिवासी समूह निवास करते हैं। इस समूह की खास बात है कि यह प्रकृति द्वारा अनुशासित है। कुड़ुख भाषी जनजीवन में प्रकृति और मानव के मध्य का मधुर अंतर्सम्‍बंध स्पष्ट दिखलाई पड़ता है। कुड़ुख भाषा के शब्दकोश में चिड़ियों का स्वर शामिल है। चिड़ियों ने कुड़ुख समूह को कई शब्द दिये हैं। मनुष्य के लिए इस से सुन्दर और कोई बात नहीं हो सकती !

कुड़ुख भाषा में एक गीत है :-

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नयी शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं का स्थान

2 months 2 weeks ago
नयी शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं का स्थान

सार: किसी भी भाषा के लुप्त होने या उसके संकटग्रस्त श्रेणी में आ जाने के परिणाम बहुत दूरगामी होते हैं। भाषा का एक-एक शब्द महत्त्वपूर्ण होता है। प्रत्येक शब्द अपने पीछे संस्कृति की एक लंबी परंपरा को लेकर चलता है। इसलिए भाषा लुप्त होते ही संस्कृति पर खतरा मंडराने लगता है। संस्कृति और उस भाषा के संचित ज्ञान को बचाने के लिए भाषा के संरक्षण की बहुत आवश्यकता है। भारत की नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में इस बात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि दुर्भाग्य से भारतीय भाषाओं को समुचित ध्यान और देखभाल नही मिल पायी है, जिसके तहत देश ने विगत 50 वर्षों में 220 भाषाओं को खो दिया है। युनेस्को ने 197 भ

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कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट कॉम का 2रा प्रिंट एडिशन आ गया..

2 months 3 weeks ago
कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट कॉम का 2रा प्रिंट एडिशन आ गया..

कुंड़ुख टाइम्‍स डॉट काम के प्रिंट एडिशन का दूसरा अंक प्रस्‍तुत है। इस अंक में हमने कई महत्‍वपूर्ण विषयों को समेटा है। कुंड़ुख भाषा की लिपि तोलोंग सिकि के आयामों पर व्‍यापक चर्चा शामिल है। तोलोंग सिकि की नींव का अपना एक इतिहास है। जी हां, आपने ठीक याद किया, झारखंड अलग राज्‍य आंदोलन। इस प्रसंग में भी हम जानेंगे कुछ अन्‍य पहलू। इसके अलावा इस अंक में चर्चा होगी , धुमकुडि़या, राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020, टीसीएस द्वारा चलाये जा रहे भाषा शिक्षण केंद्र की प्रासंगिकता, आदि। इस प्रिंट एडिशन को पीडीएफ फॉर्मेट में यहीं पढ़ा जा सकता है। आप चाहें तो इसे डाउनलोड कर के भी पढ़ सकते हैं। 

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं मातृभाषा शिक्षा

2 months 3 weeks ago
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं मातृभाषा शिक्षा admin Sun, 04/10/2022 - 08:51

भारतीय संविधान के चौथे भाग उल्लिखित नीति निदेशक तत्वों में कहा गया है कि प्राथमिक स्तर पर सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षण की व्यवस्था की जाए। सामान्य परिचय :- जब देश 15 अगस्त 1947 ई० को स्वतंत्र हुआ, तभी से ही भारत में शिक्षा नीति पर जोर दिया जा रहा है। सन् 1948 ई० में विश्वणविद्यालय शिक्षा आयोग डॉ० राधाकृष्ण की अध्यक्षता में बनी, फिर 1952 में माध्यमिक शिक्षा आयोग जिसकी अध्यक्षता श्री लक्ष्मण स्वामी मुदालियर ने की, जिसे मुदालियर आयोग के नाम से भी जानते है। 1964 ई० में शिक्षा नीति श्री दौलत सिंह कोठारी की अध्यक्षता में बनी जो कि 1986 का राष्ट्रीय शिक्षा नीति को कोठारी आयोग से जानत

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