औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?
आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा निर्मित ढाँचे, सोच और मूल्य आज भी कई रूपों में जीवित हैं। इसे निम्नलिखित बिंदुओं में विस्तार से समझा जा सकता है—
1. औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) -