Aggregator

उरांवों के दक्षिण से उत्तर भारत यात्रा : एक पुस्तक समीक्षा

1 week 2 days ago
उरांवों के दक्षिण से उत्तर भारत यात्रा : एक पुस्तक समीक्षा

इस पुस्तक के लेखक डिब्रूगढ़, असम निवासी श्री योगेश्वर उरांव जी हैं। श्री योगेश्वर उरांव जी असम सरकार में "असम राज्य वित्त सलाहकार" पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। इस पुस्तक में उरांव आदिवासी समुदाय के कई अनकही बातों एवं पक्षों को शब्द दिया गया है। आदिवासी 
नवयुवक-नवयुवतियों एवं शोधकर्ताओं के लिए इस पुस्तक का अवलोकन ज्ञान वर्धक होगा। इस पुस्तक का पी.डी.एफ. स्वरूप आप सबों के सामने है। इस पुस्तक की मूल प्रति प्राप्ति हेतु संपर्क करें -
Jugeswar Oraon 
Vill.& Post Banipur
Via CR Building, Dibrugarh Assam 
PIN 786003
Mob. No. 9864359473 तथा ईमेल 

admin

झारखंड साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार वितरण 2026 - तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्‍मानित

1 week 4 days ago
झारखंड साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार वितरण 2026 - तोलोंग सिकि के जनक डॉ नारायण सम्‍मानित

रांची: आज दिनांक 21.02.2026 दिन शनिवार को प्रेस क्लब रांची में अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर अखिल झारखंड साहित्य अकादमी पुरस्कार सम्मान 2026 झारखंड के 9 साहित्यकारों के रचनाकारों के साथ ओल चिकि लिपि के रचयिता श्रद्धेय पं रघुनाथ मुर्मू तथा वरांग चिति के रचयिता श्रद्धेय कोल लाको बोदरा को मरणोपरांत उनके वंशजों को यानी कूल 11 साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया।

admin

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?

1 month 3 weeks ago
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति क्यों चाहिए?

आजादी के पचहत्तर साल बाद भी भारत अंग्रेज और अंग्रेजियत (औपनिवेशिक  गुलामी) से मुक्त नहीं हुआ है”—इस उक्ति को यदि गहराई से समझें, तो यह किसी भौतिक गुलामी की नहीं बल्कि मानसिक, सांस्कृतिक, प्रशासनिक और वैचारिक गुलामी की ओर संकेत करती है। भारत ने 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता तो प्राप्त की, परंतु औपनिवेशिक सत्ता द्वारा निर्मित ढाँचे, सोच और मूल्य आज भी कई रूपों में जीवित हैं। इसे निम्नलिखित बिंदुओं में विस्तार से समझा जा सकता है—
1. औपनिवेशिक मानसिकता (Colonial Mindset) - 

admin

हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ  और समाधान के  कुछ रास्ते 

2 months ago
हमारे कुँड़ुख भाषा-सेवियों के समक्ष चुनौतियाँ  और समाधान के  कुछ रास्ते 

यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि गुमला, रांची, लातेहार और लोहरदगा के युवा गणित (Maths) जैसे कठिन विषय को भी कुँड़ुख में ढाल रहे हैं। प्रसिद्ध अफ्रीकी लेखक  चिंतक न्गुगी वा थ्योंगो ने हमेशा यही कहा कि - "भाषा केवल साहित्य के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान और तर्क के लिए भी होनी चाहिए" । जब हम Area = Length x Width जैसी अवधारणाओं को अपनी मातृभाषा में समझते हैं, तो वह रटना नहीं, बल्कि 'अनुभव करना' हो जाता है।

admin

अद्दी अखड़ा, संस्था के वरिष्ठ कर्मयोगी सदस्य को विनम्र श्रद्धांजलि

2 months 1 week ago
अद्दी अखड़ा, संस्था के वरिष्ठ कर्मयोगी सदस्य को विनम्र श्रद्धांजलि admin Sun, 12/28/2025 - 14:54

अद्दी कुडुख़ चाःला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा, रांची, संस्था के वरिष्ठ सदस्य श्रद्धेय
श्री मंगरा उरांव का दिनांक 22.12.2025 को रात्रि में, निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। वे
एच0ई0सी0, हटिया, रांची से कनीय अभियन्ता के पद से 1992 में वी.आर.एस. लेकर सेवा
निवृत हुए थे। उनका जन्म वर्तमान लोहरदगा जिला के सेन्हा थाना अन्तर्गत एकागुड़ी
कुम्बाटोली गांव में 15 जनवरी 1936 को हुआ था। उनकी मैट्रिक तक की शिक्षा लोहरदगा
जिले के स्कूलों में हुई। उसके बाद वे ड्राफ्टसमैंन ट्रेड से आई0टी0आई0 किये। फिर रांची

admin

कोटवार प्रशिक्षण कार्यक्रम रांची में संपन्‍न

3 months 1 week ago
कोटवार प्रशिक्षण कार्यक्रम रांची में संपन्‍न admin Mon, 11/24/2025 - 09:29

आज दिनांक 23/11/2025 दिन रविवार को Tribal Education Awareness Management (TEAM) धुमकुड़िया के अगुवाई में coordinator(कोटवार) प्रशिक्षण कार्यक्रम बनहोरा, रांची झारखंड में टाना भगत अतिथि गृह हॉल में किए गए। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री महादेव टोप्पो (साहित्यकार सह सदस्य, साहित्य अकादमी), डॉ अभय सागर मिंज (प्रोफेसर, मानव शास्त्र), प्रोफेसर रामचंद्र उरांव (प्रोफेसर लॉ ), डॉ नारायण उरांव 'सैन्दा', तोलोंग सिकि जनक और श्री अजय केरकेट्टा (फाउंडर झारखंड DMC) ने धुमकुड़िया, व्यक्तित्व विकास, स्वरोजगार, भाषा- लिपि एवं टीम धुमकुड़िया को सशक्त करने में कॉर्डिनेटर कि भूमिका, कार

admin

कुडुख तोलोंग सिकि का विकास और झारखण्ड अधिविद्य परिषद, रांची का मार्ग दर्शन

3 months 2 weeks ago
कुडुख तोलोंग सिकि का विकास और झारखण्ड अधिविद्य परिषद, रांची का मार्ग दर्शन admin Thu, 11/20/2025 - 13:00

वर्ष 2008 में झारखण्ड अधिविद्य परिषद, रांची के कार्यालय में एक आवेदन समर्पित हुआ। उस
आवेदन में मांग किया गया था कि - हमारे स्कूल के विद्यार्थी कुड़ख़ भाषा विषय की पढ़ाई
कुडुख़ की लिपि, तोलोंग सिकि में किये हैं, इसलिए इन्हें अपनी भाषा की लिपि में परीक्षा लिखने
की अनुमति प्रदान की जाए। वह आवेदन, कुड़ख़ कत्थ खोड़हा लूरएड़पा भगीटोली, डुमरी,
गुमला के गैरसरकारी स्कूल के विद्याथियों के लिए था और विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा आवेदन
समर्पित किया गया था। इस आवेदन के आलोक में झारखण्ड अधिविद्य परिषद, रांची के

admin

बी.एन. जालान  महाविद्यालय, सिसई, गुमला में कुँडुख भाषा विषय की पढ़ाई-लिखाई  तोलोंग सिकि में करने की मांग

3 months 2 weeks ago
बी.एन. जालान  महाविद्यालय, सिसई, गुमला में कुँडुख भाषा विषय की पढ़ाई-लिखाई  तोलोंग सिकि में करने की मांग admin Wed, 11/19/2025 - 10:30

आज दिनांक 17/11/2025 दिन मंगलवार को कार्तिक उराँव आदिवासी कुडुख स्कूल, मंगलो, सिसई के  प्रधानाध्यापक एवं  9+7 + 6 पड़हा (२२गांव सभा) सिसई-भरनो की ओर से  बी.एन. जालान काॅलेज, सिसई में कुँडुख भाषा का पठन-पाठन  में कुँडुख भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि को पाठ्यक्रम में शामिल कराये जाने के लिए प्रिन्सिपल महोदय को दो मांग पत्र दिया गया।

admin

कुड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया का 18वां राष्ट्रीय अधिवेशन झारसुगुड़ा ओड़िशा में सम्पन्न

3 months 2 weeks ago
कुड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया का 18वां राष्ट्रीय अधिवेशन झारसुगुड़ा ओड़िशा में सम्पन्न admin Mon, 11/17/2025 - 11:35

Kurukh literary society of India ( कुँड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी ऑफ़ इंडिया ) नई दिल्ली द्वारा आयोजित 18 वां राष्ट्रीय कुँड़ुख़ सम्मेलन 2025 सम्पन्न हुआ। यह राष्ट्रीय अधिवेशन 24 अक्टूबर से 26 अक्टूबर 2025 तक स्थान - झारसुगुड़ा उड़ीसा मे आयोजित किया गया था ।इस आयोजन में कुड़ुख़ लिटरेरी सोसायटी आफ इंडिया के सभी चैप्टर ( राज्य) उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, महाराष्ट्र, चेन्नई, दिल्ली, नेपाल इत्यादि से कुड़ुख़ साहित्यकार, लेखक, बुद्धिजीवी, कुड़ख़ भाषा के लेक्चर, प्रोफेसर, शिक्षक, शिक्षिकाएं, शोधार्थी एवं छात्र छात्राएं शामिल हुए।

admin

तीन दिवसीय आदिवासी सरना युवा प्रशिक्षण शिविर सराजपुर, सुंदरगढ़, उड़ीसा में सम्‍पन्‍न

3 months 2 weeks ago
तीन दिवसीय आदिवासी सरना युवा प्रशिक्षण शिविर सराजपुर, सुंदरगढ़, उड़ीसा में सम्‍पन्‍न admin Mon, 11/17/2025 - 11:29

मान्दर के संबंध में कुड़ुख़ (उराँव) लोक गीत (मान्दर को कुड़ुख़ भाषा में ख़ेःल कहा जाता है)। इस शिविर में शामिल होने के लिए मैं 24 घंटे  में 605 किलोमीटर का दूरी तय करके  प्रशिक्षण शिविर स्थान पहूंचा । इसके लिए मैं झारखण्‍ड के गुमला जिला के  बिशनपुर थाना के सखुवा टोला गांव से 145 किलोमीटर की दूरी स्‍कूटी से तय करके  रांची पहूंचा । फिर  130 किलोमीटर की दूरी तय करके  रांची से टाटा पहूंचा। उसके बाद टाटा से झारसुगुड़ा  260 किलोमीटर की दूरी रेलगाड़ी से तय किया ।...

admin