झारखण्ड सरकार ने कहा – तोलोंग सिकि कुंड़ुख़ भाषा की लिपि

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ज्ञात हो कि तोलोङ सिकि अथवा तोलोंग लिपि को कुँड़ुख (उराँव) समाज ने कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में स्वीकार किया है। इस लिपि को झारखण्ड सरकार, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के पत्रांक 129 दिनांक 18.09.2003 के द्वारा कुँड़ुख (उराँव) भाषा की लिपि के रूप में उद्धृत किया है। इस सरकारी विभागीय पत्र के माध्यम से कहा गया है कि झारखण्ड राज्य के अंतर्गत संथाली, मुंडारी, हो, उरांव/कुंड़ुख़ भाषा एक महत्वपूर्ण स्थान है। संथाली भाषा की लिपि ‘ओल सिकि’, मुण्डारी भाषा की लिपि ‘देवनागरी’, हो भाषा की लिपि ‘वराङक्षिति’ तथा उरांव/कुंड़ुख़ भाषा की लिपि ‘तोलोंग सिकि’ है। झारखण्ड सहित अन्य कई राज्यों में इन भाषाओं की पढ़ाई विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालय स्तर पर होती है।
इस निर्णय के आलोक में झारखण्ड अधिविद्य परिषद, राँची के विज्ञप्ति संख्या 17/2009, DPO-20.02.2009 द्वारा वर्ष 2009 में सर्वप्रथम, कुँड़ुख़ कत्थ खोंड़हा लूरएड़पा, लूरडिप्पा, भगीटोली, गुमला, के छात्रों को मैट्रिक परीक्षा में कुँड़ुख़ भाषा विषय की परीक्षा लिखने की अनुमति दी गयी। उसके बाद, झारखण्ड अधिविद्य परिषद, राँची के अधिसूचना संख्या- JAC/गुमला/16095/12-0607/16 दिनांक 12.02.2016 द्वारा वर्ष 2016 से मैट्रिक में  सभी स्कूालों के लिए कुँड़ुख़ भाषा पत्र की परीक्षा तोलोङ सिकि (लिपि) में परीक्षा लिखने की अनुमति प्राप्त हुई है। 
ध्यातब्य हो कि 01 जून 2018 से पश्चिम बंगाल सरकार में कुँड़ुख़ भाषा (तोलोङ सिकि के साथ) बैधानिक रूप से 8वीं सरकारी भाषा के रूप में शामिल किया गया है, जिनसे बंगला, नेपाली, हिन्दी, उर्दू, उड़िया, संताली, पंजाबी के साथ कुँड़ुख़ भाषा भी जुड़ गया है। 

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