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तोलोंग सिकि (लिपि) का संक्षिप्त इतिहास

तोलोंग सिकि (लिपि) का संक्षिप्त इतिहास

तोलोंग सिकि, भारतीय आदिवासी आन्दोलन एवं झारखण्ड का छात्र आन्दोलन की देन है। यह लिपि, आदिवासी भाषाओं की लिपि के रूप में विकसित हुर्इ है। इस लिपि को कुँड़ुख (उराँव)़ समाज एवं झारखण्ड सरकार ने कुँड़ुख़ भाषा की लिपि के रूप में मान्यता दी है तथा कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के पत्रांक 129 दिनांक 18.09.2003 द्वारा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने हेतु अनुशंसित किया गया है। इससे वर्ष 2009 सत्र … Read entire article »

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तोलोङ सिकि के विकास की रूपरेखा

तोलोङ सिकि के विकास की रूपरेखा

कहा जाता है – ‘‘ आवश्‍यकता आविष्कार की जननी है।’’ इस कहावत को एक बार फिर डा नारायण उराँव ‘‘सैन्दा’’ ने चरितार्थ किया है। पेशे से चिकित्सक डा उराँव एक कुँडु़ख़ (उराँव) गाँव के रहने वाले एक अत्यंत साधारण किसान के बेटे हैं। उनके पिता का नाम स्व भुनेश्‍वर उराँव तथा माता का नाम श्रीमती फूलमनी उराँव है। उनका पैतृक निवास झारखण्ड राज्य (भारत) के गुमला जिला, सिसई थाना के अन्तर्गत ‘‘सैन्दा’’ ग्राम है। उनकी … Read entire article »

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